होशंगाबाद की सरकारी ई लायब्रेरी के जरिए दर्जनों विदेशी सीख रहे हैं हिंदी की बारीकियां

प्यार की खातिर हिंदी सीख रही हैं वे

     ब्राजील की फर्नांडा, पोलैंड की केरिया रवायक और अमेरिका की डी कोलेर अपने प्यार की खातिर हिंदी सीखने की जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं।

आशीष बिल्लौरे, होशंगाबाद

     पोलैंड निवासी 'केसिया रवायक' हिंदी गानों की शौकीन है। वह महज इसलिए हिंदी सीख रही हैं क्योंकि उसे अगले बरस अपने प्रेमी बारत्ये के साथ पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ आकर पंजाबी रीति से शादी करना है। केसिया के मुताबिक शादी चर्च में भी हो सकती थी, किंतु भारत में एक जन्म के लिए नहीं बल्कि सात जन्मों के लिए व्यक्ति विवाह बंधन में बंधता है। यहां की बोली और परंपरा बहुत प्यारी लगती है, खासकर पंजाबी तौर-तरीकों ने उसके परिवार को काफी प्रभावित किया है।

     अमेरिका की पेंसिलवेनिया निवासी डी कोलेर इंदौर के एक व्यवसायी से प्यार करती हैं और घर बसाना चाहती हैं। शादी के बाद इंदौर में ही रहेंगी, इसीलिए वे हिंदी सीख रहीं हैं। ऐसे ही दर्जनों विदेशियों को होशंगाबाद की सरकारी ई लाइब्रेरी के जरिए निशुल्क हिंदी सिखाई जा रही है।

     इन्हें वेबसाइट www.hindiseekho.blogspot.com के जरिए भाषा की बारीकिया से परिचित कराया जा रहा है। लायब्रेरी प्रभारी प्रतीक शर्मा बताते हैं कि प्रति शुक्रवार इन सभी के लिए खास 'ई कक्षाएं' लगती हैं। कक्षा में लगभग २०-२५ देशों के नागरिक नियमित रूप से हिंदी सीख रहे हैं। इन्हें व्याकरण और हिंदी शब्दों के उच्चारण का अभ्यास कराया जाता है।

     कक्षा आनलाइन होती है इसमें अमेरिका के ओरेगान प्रांत की राज अलफ्रोड और बुलगारिया विश्वविद्यालय की हिंदी प्रोफेसर मोना कौशिक हिंदी सीखने वाले विदेशियों की मदद भी करती हैं।
(दैनिक भास्कर, ३१ अगस्त २००६ )