दुनिया
की आधी भाषाएं सौ साल में खत्म हो जाएंगी
हिंदी
विश्व की दस सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में
वाशिंगटन।
विश्व में इस समय प्रतिमाह एक भाषा समाप्त हो रही है। इस हिसाब से दुनिया
की सात हजार प्रचलित भाषाओं में से आने वाले सौ सालों में आधी से ज्यादा भाषाएं
काल के गाल में समा जाएंगी और सिर्फ २५०० भाषाएं ही बचेंगी।
हाल ही में स्थानीय
संस्थान की ओर से किए गए एक अध्ययन में यह तथ्य उजागर हुई है। वाईटन साइन २००६-०७
नाम से जारी अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली
दस शीर्ष भाषाओं में हिंदी और बांग्ला शामिल हैं, जबकि आठ अन्य भाषाएं मंदारिन,
अंग्रेजी, स्पेनिश, रूसी, अरबी, पुर्तगाली, मलय-इंडोनेशियन और फ्रेंच हैं। रिपोर्ट
के अनुसार विश्व में भाषाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आऐ हैं। इसमें प्रति
सप्ताह एक भाषा का नष्ट होना भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक इस शताब्दी के
अंत तक एक ओर जहां मात्र २५०० भाषाएं अपने अस्तित्व को बचा पाएंगी, वहीं दूसरी
और ९० प्रतिशत भाषाएं असरदार भाषाओं के प्रभाव में आकर अपने मौलिक स्वरूप को
खोकर दूसरी शक्ल अख्तियार कर लेंगी।
रिपोर्ट कहती है
कि विश्व की प्रचलित सात हजार भाषाओं में से आधी से ज्यादा भाषाएं नष्ट होने
के कगार पर हैं, जबकि ५५० भाषाएं ऐसी हैं, जिन्हें सौ से भी कम लोग बोल रहे हैं।
इसके अनुसार ५० प्रतिशत भाषाओं का प्रयोग करने वालों की लगातार संख्या कम हो
रही है और इनमें से ९५ प्रतिशत भाएं सिर्फ छह प्रतिशत लोग बोलते हैं। रिपोर्ट
के अनुसार भाषाओं के समाप्त होने के प्रमुख कारण क्षेत्रीय भाषाओं पर प्रतिबंध
लगाया जाना, युद़्ध, आव्रजन और सांस्कृतिक बदलाव हैं, जबकि कुछ भाषाएं उनके बोलने
वालों द्वारा स्वत: अपनी मूल भाषा को छोड़ने के कारण समाप्त हो जाती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार
किसी समुदाय द्वारा सामाजिक और आर्थिक उत्थान की लालसा में दूसरी भाषा को अपनाना
भी उनकी भाषा के अंत का एक अन्य प्रमुख कारण है। रिपोर्ट के अनुसार संकटग्रस्त
भाषाओंे के संरक्षण में सरकारें और गैर सरकारी संगठन सराहनीय प्रयास कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार विश्व में हिंदी बोलने वालों की संख्या ४९.६ करोड़ है, जबकि
बांग्ला भाषियों की संख्या २१.५ करोड़ है। इसके अलावा विश्व की ५१.४ प्रतिशत
आबादी अंग्रेजी भाषा बोलती है। रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ अंग्रेजी भाषा का प्रयोग
सबसे तेज गति से बढ़ रहा है। (राज एक्सप्रेस, १७ जुलाई, २००६)