एडीसन। अगले वर्ष गर्मियों में न्यूजर्सी, अमेरिका के दो जिलों, एडीसन और वेस्ट विंडसर प्लेसबोरो के मिडिल और हाई स्कूलों के पाठ्यक्रमों में हिन्दी को स्थान मिलने के साथ ही यहां पर रहने वाले ५४८८० हिन्दीभाषी परिवारों की वह मांग पूरी हो जायेगी जो वे लम्बे समय से करते आ रहे हैं।
एडीसन न्यूजर्सी का पहला और अमेरिका का दूसरा जिला होगा जहां हिन्दी को स्कूलों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जायेगा। इससे पहले टैक्सास के ह्यूस्टन जिले के स्कूलों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। एडीसन के इस विषय से जुड़े शिक्षा अधिकारी इस सन्दर्भ में ह्यूस्टन के अधिकारियों के साथ मिल कर पाठ्यक्रम तैयार करने में व्यस्त हो गए हैं ताकि अगले वर्ष गर्मियों में बच्चों को इस भाषा की पढ़ाई करवाई जा सके। एडीसन के अधिकारियों ने इसके लिए केन्द्रीय सरकार से चार करोड़ रुपए के अनुदान की मांॅग की है।
ज्ञातव्य है कि एडीसन के स्कूलों में इस समय विश्व भाषा के रूप में फ्रेंच, स्पैनिश और लैटिन भाषाओं को पढ़ाने का प्रावधान है। इसी प्रकार से वेस्ट विंडसर में जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश और लैटिन भाषाएं सिखाई जाती हैं। इन स्कूलों के अधिकारी हिन्दी को लेकर खासे उत्साहित हैं।
अमरीका में एक गैर सरकारी संस्था हिन्दी यू.एस.ए. एक लम्बे समय से इस बात की मांग करती रही है कि अमरीका के सभी स्कूलों में हिन्दी पढ़ाई जानी चाहिए। इसके संयोजक श्री देवेन्द्र सिंह का कहना है कि हिन्दी विश्व में दूसरे नम्बर पर सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है इसलिए इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। उनका मत है कि अमरीका में हिन्दी के प्रचार प्रसार से दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले राष्ट्रों के परस्पर संबंध सुदृढ़ होंगे। दोनों राष्ट्रों के लोगों की आपसी समझ में बढ़ोतरी होगी। वैसे भी इन दिनों अमरीका भारतवर्ष में बहुत अधिक आउटसोर्सिंग कर रहा है। इससे इन लोगों को परस्पर संवाद करने में आसानी होगी। इन दिनों बहुत से अमरीकी छात्र भारत में पढ़ाई करने के लिए भी आ रहे हैं। यदि उनको हिन्दी का ज्ञान होगा तो वे न केवल अपनी पढ़ाई ठीक से कर पायेंगे बल्कि उन्हें भारत के जन-जीवन को भली भांति समझने का अवसर भी प्राप्त होगा।
श्री सिंह का कहना है कि इस समय अमरीका के अनेक प्रांतों में जर्मन और फ्रेंच बोलने वालों से कहीं अधिक संख्या हिन्दी बोलने वाले लोगों की है। अमरीकी सरकार को इस बात की ओर ध्यान देना चाहिए।
श्री सिंह ने इस बात पर चिन्ता व्यक्त की है कि न्यू जर्सी के एक अन्य जिले साउथ बरूनस्विक ने अभी तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया जबकि वहां भी हिन्दी बोलने वाले लोग अच्छी खासी संख्या में हैं। इस जिले के अधिकारियों का कहना है कि हमने अभी-अभी विश्व भाषाओं के संबंध में निर्णय लिया है और जो भाषाएं हमने चुनी हैं उनके पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। आखिर किसी नई भाषा की पढ़ाई को प्रारम्भ करने के लिए कई प्रकार के प्रबंध करने पड़ते हैं, इसके लिए धन की व्यवस्था तो करनी ही पड़ती है, उसे पढ़ाने वाले शिक्षकों की भी जरूरत होती है। इस नीति पर हम २०१० में फिर से विचार करेंगे।
इस सन्दर्भ में श्री देवेन्द्र सिंह का मानना है कि हम लोग एक लोकतंत्र में रह रहे हैं यदि जनता की मांग होगी तो अधिकारियों को उनकी मांग को स्वीकार करना ही होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषी लोगों को अपनी मांग और अधिक प्रभावी ढंग से उठानी चाहिए। (साहित्य कुंज, कनाडा १०.०८.२००६ से साभार)